मामला जेएमएस माइनिंग प्रा.लिमटेड उरतन नॉर्थ भूमिगत कोल माइंस परियोजना का, भूमि के बदले किसानों को नहीं दी गई नौकरी धोखे में रखकर आउटसोर्सिंग से काम कराया जा रहा है,
कोतमा – किसानो की भूमि विकास के नाम पर लेकर किसानों के आश्रितों को आज तक नौकरी नहीं दी गई बल्कि दिखावे के लिए आउटसोर्सिंग काम में रखकर दैनिक मजदूरी दी जा रही है जिसको लेकर किसानों के आश्रित मजदूरों ने दो बार अपनी मांगों को रखकर हड़ताल किया किंतु नतीजा कुछ भी न निकलने से किसान के युवा बेरोजगार अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं, मामला जेएमएस उरतन नॉर्थ भूमिगत कोल माइंस परियोजना एवं ठोड़हा कोल माइंस का मामला बताया जाता है कि कोयला उत्खनन के लिए किसानों से भूमि अधिग्रहण कर कोयला उत्पादन के लिए कार्य जारी है किसानों से भूमि के बदले मुआवजा के साथ नौकरी दिए जाने का वादा किया गया था जिसमें बीते 2 साल में आज तक नौकरी उपलब्ध नहीं कराया गया जिससे किसान ठगे से महसूस कर रहे हैं किसानों के आश्रितों ने बताया कि नौकरी के नाम पर हमें कंपनी में आउटसोर्सिंग से काम कराया जा रहा है जिसका मजदूरी हमें दिहाड़ी के रूप से दी जा रही है जिस संबंध में कई पर विधानसभा कोतमा के विधायक एवं मध्य प्रदेश के मंत्री दिलीप जायसवाल से गुहार लगाया गया किंतु किसानों का पीड़ा ना सुनने के कारण कंपनी के अधिकारियों के हौसले बुलंद है और किसानों के आश्रितों को आज तक नौकरी प्रदान नहीं की गई बल्कि दिहाड़ी मजदूर के नाम पर रखा हुआ है और मजदूरी दे रहे हैं देश के विकास के लिए किसान अपनी उपज भूमि को किसानों ने सरकार के कहने पर कंपनी को सौंप दिया जिसके बदले उन्हें मुआवजा मिला साथ ही नौकरी का वादा था जो कि आज तक पूरा नहीं हुआ जिसको लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की गई है कि आदिवासी किसानों के भूमि अधिग्रहण के बदले नौकरी प्रदान कर कोल इंडिया के तहत वेतन एवं अन्य सुविधाएं दिए जाएं।
कई बार फोन किया गया फोन उठाने पर अधिकारी बोला मैं बैठक में व्यस्त हूं।
संजय कहरा उप क्षेत्रीय प्रबंधक
जेएमएस उरतन नॉर्थ भूमिगत कोल माइंस परियोजना











