केल्हारी चेक डैम घोटाला जेसीबी से खुदाई, मजदूरों को नहीं मिला काम, अब रेंजर कर रहा अपनी ही जांच
रिपोर्टर नीतू सिंह
स्थान – एमसीबी
छत्तीसगढ़ एमसीबी जिले के मनेंद्रगढ़ वनमण्डल के वन परिक्षेत्र केल्हारी से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक चेक डैम निर्माण में न सिर्फ नियमों को ताक पर रखा गया, बल्कि करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार की भी आशंका जताई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के रेंजर द्वारा दो चेक डैम का निर्माण जेसीबी मशीन से कराकर मजदूरों को रोजगार से वंचित किया गया। अब इसी मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जो रेंजर खुद इस निर्माण का जिम्मेदार है, वही अब अपनी ही जांच करने का दावा कर रहा है। शायद आपने पहले कभी ऐसा नहीं सुना होगा कि दोषी अधिकारी खुद ही अपनी गड़बड़ी की जांच करे रोजगार के नाम पर धोखा, जेसीबी से कराई गई खुदाई राज्य सरकार की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसके लिए मनरेगा जैसी योजनाएं संचालित हैं। परंतु केल्हारी वन परिक्षेत्र के त्रिलोखन बीट में दो चेक डैम के निर्माण में सरकार की इस मंशा की खुलकर धज्जियाँ उड़ाई गईं। ग्रामीणों का कहना है कि यह काम मजदूरों से कराकर उन्हें रोजगार दिया जाना चाहिए था, परंतु रेंजर ने जेसीबी मशीन लगाकर खुदाई करवाई और मजदूरों को काम से वंचित कर दिया।ग्रामीण हीरा सिंह का कहना है, “रेंजर ने मजदूरों को काम नहीं दिया। जेसीबी से खुदाई कर पैसा डकार लिया गया है। हम लोगों का पेट मरा पड़ा है। जो काम हमसे होना था, वो मशीन से करवा दिया गया गुणवत्ता पर उठे सवाल, बिना पत्थर लगाए बने चेक डैम इतना ही नहीं, निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार, लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद चेक डैम में पत्थरों का इस्तेमाल नहीं किया गया। इससे हल्की बारिश में ही डैम की स्थिति दयनीय हो गई है और इनके बह जाने का खतरा बना हुआ है। इससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया और बड़ी मात्रा में राशि का दुरुपयोग हुआ पेड़ काटे गए, पर्यावरण को नुकसान ग्रामीणों ने बताया कि जेसीबी से खुदाई के दौरान कई हरे-भरे पेड़ भी काट दिए गए, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ है। यह कार्य पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेंजर ने मनमानी रवैया अपनाते हुए न तो ग्रामसभा से अनुमति ली और न ही मजदूरों से काम करवाया रेंजर का अजीबो-गरीब जवाब: “मैं ही जांच करूंगा” जब इस मामले में मीडिया ने रेंजर रघुराज सिंह से सवाल किया कि जेसीबी से काम क्यों कराया गया और मजदूरों को काम क्यों नहीं दिया गया, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि “मैं ही इस मामले की जांच करूंगा”। यह सुनकर ग्रामीण हैरान हैं। ग्रामीण महिला का बयान भी चर्चा में है जिसने कहा, “जैसे भी कराया है, वहां तीन लोग आए थे, हमसे तो कोई काम नहीं लिया गया प्रशासन की चुप्पी, ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भ्रष्टाचार के ऐसे मामले अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकते हैं राजकुमार पूरी ने बताया, “हमने कलेक्टर से भी शिकायत की है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। करोड़ों का घोटाला कर मजदूरों को वंचित किया गया है। जो पत्थर लगाने थे, वो भी नहीं लगाए गए। कोई बोर्ड नहीं है, जिससे पता चले कि कितनी राशि खर्च हुई और किसका निर्माण है।”
क्या कहता है कानून?
मनरेगा और अन्य ग्रामीण रोजगार योजनाओं के अंतर्गत यह स्पष्ट है कि निर्माण कार्यों में श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाए। मशीनों का उपयोग तब किया जाना चाहिए जब मानवीय संसाधन अपर्याप्त हों। लेकिन यहां तो उलटा हुआ। न सिर्फ मशीन से कार्य कराया गया, बल्कि गुणवत्ता की अनदेखी कर शासकीय धन को भी नुकसान पहुंचाया गया सवालों के घेरे में रेंजर की भूमिका क्या किसी अधिकारी को अपनी ही जांच करने का अधिकार है बिना ग्रामसभा की अनुमति के कार्य कैसे हुआ चेक डैम में बिना पत्थर के निर्माण की अनुमति किसने दी पेड़ों की कटाई पर क्या वन अधिनियम की अनदेखी हुई मजदूरों को रोजगार न देना क्या सरकारी नीतियों के विरुद्ध नहीं है केल्हारी का यह मामला शासन-प्रशासन के लिए चेतावनी है। जहां एक ओर गरीब ग्रामीण रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, वहीं सरकारी अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों का बंदरबांट कर रहे हैं। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह न सिर्फ शासन की योजनाओं पर प्रश्नचिह्न लगाएगा बल्कि आने वाले समय में जन विश्वास भी डगमगा सकता है अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन कब जागता है और भ्रष्टाचारियों पर क्या कार्रवाई होती है। ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की ओर टिकी हैं।











